डर के साये में शिक्षा,,जहाँ किताबें नहीं,,डर बाँटा जाता है…
सूरजपुर-ज़िले में संचालित एकलव्य आवासीय विद्यालय इन दिनों शिक्षा के नाम पर अत्याचार, डर और अमानवीय व्यवहार को लेकर गंभीर आरोपों के घेरे में है। जिस संस्थान को आदिवासी और वंचित बच्चों के भविष्य को संवारने का माध्यम माना जाता है,आज उसी विद्यालय में बच्चों का बचपन, सम्मान और अधिकार कुचले जा रहे हैं।
रविवार को भी जबरन पढ़ाई, बच्चों से छीना जा रहा बचपन…
सूत्रों के मुताबिक़, इस विद्यालय में सप्ताह के छह दिन ही नहीं, बल्कि रविवार को भी जबरन संपूर्ण पढ़ाई कराई जाती है, बच्चों को मानसिक विश्राम, खेल या पारिवारिक संपर्क का अवसर नहीं दिया जाता, पढ़ाई के नाम पर अनुशासन नहीं, दमन थोपा जाता है।

त्योहार पर घर जाने की बात की तो क़ानून का डर…
अगर कोई बच्चा त्योहार या पर्व के अवसर पर अपने घर जाने की इच्छा जताता है, तो उसे स्नेह या संवेदना नहीं मिलती।
उल्टा बच्चों को क़ानून का हवाला दिया जाता है,
पूरा “सिस्टम” गिनाया जाता है, और वह भी असभ्य व बदतमीज़ भाषा में
गाली, मारपीट और मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप…
विद्यालय से जुड़ी जानकारियों और परिजनों के अनुसार बच्चों को गालियाँ दी जाती है मारपीट की जाती है, मानसिक रूप से डराया जाता है कि शिकायत की तो हालात और ख़राब कर दिए जाएंगे, यह सब उस जगह हो रहा है जिसे समाज “शिक्षा का मंदिर” मानता है।
परिजनों से मिलने पर भी पाबंदी, परिवारों का अपमान…
स्थिति यहीं नहीं रुकती। जब परिजन अपने बच्चों से मिलने विद्यालय पहुँचते हैं, तो कई बार मुलाक़ात तक नहीं करने दी जाती, परिवारजनों के खिलाफ अभद्र और अपमानजनक टिप्पणियाँ की जाती हैं, यह रवैया बच्चों के साथ-साथ पूरे परिवार की गरिमा पर चोट है।

सत्र ख़त्म होने को, लेकिन अब तक यूनिफॉर्म नहीं…
चिंता की बात यह भी है कि विद्यालय का शैक्षणिक सत्र समाप्त होने को है, लेकिन अब तक छात्रों को यूनिफॉर्म (गणवेश) उपलब्ध नहीं कराई गई है। यह दर्शाता है कि बच्चों की मूलभूत ज़रूरतों तक की अनदेखी की जा रही है।
भोजन की गुणवत्ता भी सवालों के घेरे में…
विद्यालय में बच्चों को मिलने वाला भोजन भी उस गुणवत्ता का नहीं रहता, जैसा एक आवासीय विद्यालय में होना चाहिए।
पोषण के साथ हो रहा यह समझौता बच्चों के स्वास्थ्य और विकास दोनों के लिए गंभीर ख़तरा है।
डर के साये में बयान, सच बोलने से कांप रहे थे बच्चे…
जब भारत समाचार 24×7.net की टीम धरातल पर पहुँची और बच्चों से बयान लेना शुरू किया, तो बच्चे बेहद भयभीत और सहमे हुए नज़र आए। उनके मन में साफ डर था कि अगर हम सच बोल देंगे और स्कूल प्रबंधन को पता चल गया, तो बाद में हमें और ज़्यादा प्रताड़ित किया जाएगा, टॉर्चर किया जाएगा या मारपीट होगी। इसके बाद भारत समाचार की टीम ने बच्चों को भरोसा दिलाया कि उनकी पहचान पूरी तरह सुरक्षित रखी जाएगी, चेहरे ब्लर किए जाएंगे और कोई भी उन्हें पहचान नहीं पाएगा। तब जाकर बच्चों ने हिम्मत जुटाई और विद्यालय की अंदरूनी, डरावनी और अमानवीय स्थिति से हमारी टीम को अवगत कराया। बयान देते वक्त भी बच्चे काफी डरे और सहमे हुए दिखाई दिए।

दिल्ली से कंट्रोल का दावा, स्थानीय प्रशासन भी बेबस?…
भारत समाचार 24×7.net की टीम ने जब विद्यालय के प्राचार्य वर्मा जी से इस पूरे मामले पर बात की, तो उन्होंने चौंकाने वाला बयान दिया।
प्राचार्य के अनुसार…
यह विद्यालय दिल्ली से कंट्रोल होता है, इसका हेड ऑफिस दिल्ली में है। यहाँ पर एसी साहब हों या कलेक्टर साहब, वे भी इसमें ज़्यादा दख़ल नहीं दे सकते। यह बयान अपने-आप में पूरे सिस्टम की पोल खोलने के लिए काफ़ी है।
नोट:-यह बयान प्राचार्य का है, उन्होंने मुझे मौखिक रूप से कहा है जिसका मैं साक्षी हूं, लेकिन मेरे पास कोई आधिकारिक सबूत नहीं है।

प्रशासन की चुप्पी या संज्ञान से ओझल…
इतने गंभीर आरोपों के बावजूद शिक्षा विभाग हो, जनजाति कल्याण विभाग हो, या ज़िला प्रशासन हो सबकी चुप्पी यह दर्शाता है कि कहीं ना कहीं यह मामला या तो संज्ञान से ओझल है या फिर राजनीतिक दबाव के कारण नज़रअंदाज़ करना पड़ रहा है।
यह स्कूल नहीं, चेतावनी है…
अगर अब भी व्यवस्था नहीं जागी, तो यही जगह कल किसी बड़े हादसे की कहानी बन सकती है।
भारत समाचार 24×7.net की दो-टूक मांग…
पूरे मामले की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच, दोषी अधिकारियों, शिक्षकों और विधालय कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई, बच्चों को सुरक्षित, मानवीय और सम्मानजनक माहौल।

