क्या छत्तीसगढ़ में क़ानून किताबों में है और संरक्षण सत्ता के गलियारों में?
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✍️shabbir hasan…
Special report…
छत्तीसगढ़ | रायपुर | विशेष रिपोर्ट…
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में इन दिनों क़ानून के दोहरे मापदंडों को लेकर तीख़ी बहस छिड़ी है। सवाल यह है कि क्या क़ानून सबके लिए बराबर है, या रसूख़दार अफ़सरों के लिए नियम बदल जाते हैं?
खुफ़िया लीक पर ख़ामोशी, छोटी रिश्वत पर फ़ौरन कार्रवाई...
आरोप है कि डीएसपी कल्पना वर्मा से जुड़ा नक्सलियों की संवेदनशील खुफिया जानकारी लीक होने का मामला सामने आया, लेकिन न तो निलंबन हुआ और न ही कोई सार्वजनिक कार्रवाई दिखी। वहीं ₹30,000 की रिश्वत के आरोप में एक अन्य पुलिस अधिकारी को तत्काल सस्पेंड कर दिया गया। इससे प्रशासन की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सीएम हाउस से संरक्षण की चर्चा…
सामाजिक कार्यकर्ता कुनाल शुक्ला के फेसबुक पोस्ट के बाद मामला और गरमा गया है। पोस्ट में दावा किया गया है कि एक कथित आईपीएस अधिकारी के जरिए डीएसपी को सीएम हाउस से संरक्षण मिल रहा है, जिसके चलते नक्सली ख़ुफिया लीक जैसे गंभीर आरोपों पर भी कार्रवाई नहीं हो रही।

प्रशासन की चुप्पी बनी सवाल…
अब तक न राज्य सरकार और न ही पुलिस मुख्यालय की ओर से कोई आधिकारिक बयान या जांच की घोषणा सामने आई है। यह चुप्पी खुद संदेह को और गहरा कर रही है।
गृह मंत्रालय की ओर टिकी निगाहें…
नक्सल प्रभावित राज्य में ख़ुफ़िया जानकारी का लीक होना राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला है। ऐसे में मांग उठ रही है कि केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय तत्काल संज्ञान लें।
रायपुर में तंज अब आम है— “₹30 हज़ार लो तो सस्पेंशन,
खुफ़िया लीक करो तो ख़ामोशी!”
जब तक निष्पक्ष और पारदर्शी जांच नहीं होती, तब तक यही सवाल गूंजता रहेगा—

