ज़ब्ती कागज़ों में, सबूत ज़मीन से ग़ायब…
भारत समाचार 24×7.net…
विशेष रिपोर्ट…
✍️शब्बीर हसन…
बलरामपुर/वाड्रफनगर/बसंतपुर/छत्तीसगढ़…
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर ज़िले में सिस्टम की कार्यशैली पर सवाल खड़े करने योग्य चौंकाने वाला मामला सामने आया है। बसंतपुर थाना क्षेत्र में उत्तर प्रदेश से तस्करी कर लाई जा रही 65 बोरी अवैध धान से लदी बिना नंबर की पिकअप को 8 जनवरी 2026 की रात पकड़ा गया था। मौक़े पर नायब तहसीलदार और पुलिस टीम मौजूद थी, यहां तक कि कार्रवाई के फोटो भी खींचे गए—लेकिन इसके बाद पिकअप और धान दोनों रहस्यमय तरीके से ‘ग़ायब’ हो गए।
▶️ ना FIR, ना नीलामी… एक महीने से चुप्पी…
हैरानी की बात यह है कि एक माह बीतने के बावजूद न तो इस मामले में FIR दर्ज हुई, न ही ज़ब्त धान को राजसात करने की कोई प्रक्रिया शुरू की गई। सूत्रों के अनुसार, ऊपरी दबाव या साठगांठ के चलते अवैध माल और वाहन को बिना कार्रवाई के छोड़ दिया गया, जो मोटर व्हीकल एक्ट और आवश्यक वस्तु अधिनियम का सीधा उल्लंघन है।
▶️ पत्रकार ने खोला मोर्चा…
इस पूरे मामले को लेकर भारत सम्मान न्यूज़ के संपादक जितेंद्र कुमार जायसवाल ने 2 फरवरी 2026 को SDOP वाड्रफनगर को आवेदन सौंपते हुए FIR की मांग की है।
मुख्य सवाल जो उठाए गए:
• किसके आदेश पर अवैध धान और पिकअप छोड़ी गई?
• फरार ड्राइवर पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं?
• लापरवाही बरतने वाले तहसीलदार और पुलिसकर्मियों पर FIR कब?
शिकायत की प्रतिलिपि संभाग आयुक्त, IG सरगुजा रेंज, कलेक्टर और SP बलरामपुर को भी भेजी गई है।
▶️ जनता में चर्चा: धान गया कहां?
इलाक़े में सवाल गूंज रहे हैं—जब अधिकारी मौक़े पर थे और फोटो साक्ष्य मौजूद है, तो पिकअप आख़िर किसकी शह पर ग़ायब हुई? क्या यह मामला किसी बड़े धान तस्करी सिंडिकेट से जुड़ा है? अब देखना यह होगा कि प्रशासन सच तक पहुंचता है या यह फाइल भी सिस्टम की भेंट चढ़ जाएगी।

