‘विधायक को जवाब देना होगा’ — अंबिकापुर घटना ने खड़े किए बड़े सवाल…
भारत समाचार 24×7.net…
विशेष रिपोर्ट…
✍️शब्बीर हसन…
अंबिकापुर ! सरगुजा ! 27 फरवरी 2026
अंबिकापुर में एक पत्रकार के साथ सरेआम मारपीट की घटना ने प्रशासनिक कार्रवाई और प्रेस की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले में कोतवाली थाना में अपराध क्रमांक 0128/2026 दर्ज कर लिया गया है, लेकिन समाचार लिखे जाने तक किसी भी नामज़द आरोपी की गिरफ़्तारी नहीं हुई है।
क्या है पूरा मामला?…
जानकारी के अनुसार, शहर के गुदड़ी चौक क्षेत्र में कुछ राजनीतिक कार्यकर्ता प्रदर्शन और नारेबाज़ी कर रहे थे। घटनास्थल पर पहुंचे एक पत्रकार ने जब पूरे घटनाक्रम की वीडियो रिकॉर्डिंग शुरू की, तो कुछ लोगों ने इसका विरोध किया। आरोप है कि रिकॉर्डिंग बंद करने से इनकार करने पर पत्रकार के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की गई। साथ ही जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए जान से मारने की धमकी भी दी गई। यह पूरी घटना सार्वजनिक स्थान पर हुई।
गंभीर धाराएं, फिर भी कार्रवाई ठंडी…
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता, 2023 की विभिन्न धाराओं और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। एफआईआर में तीन लोगों को नामज़द किया गया है। हालांकि, अब तक किसी की गिरफ़्तारी नहीं होना कई सवाल खड़े कर रहा है।

विधायक को जवाब देना होगा”क्या क़ानून से ऊपर है राजनीति?…
घटना के दौरान कथित रूप से एक पुलिस अधिकारी के सामने यह कहा गया— “आपको विधायक को जवाब देना होगा।”
यह बयान अब चर्चा का विषय बन गया है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या क़ानून से ऊपर राजनीतिक दबाव हावी है? पुलिस की जवाबदेही संविधान और क़ानून के प्रति होती है, न कि किसी व्यक्ति विशेष के प्रति।
पत्रकार संगठनों में उबाल…
घटना के बाद पत्रकार संगठनों और सामाजिक संस्थाओं में भारी रोष है। प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र गिरफ्तारी नहीं हुई तो प्रदेश स्तर पर चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा।
धरना, प्रदर्शन और ज्ञापन जैसे कार्यक्रमों की तैयारी की जा रही है।

बड़ा सवाल: सुरक्षित है क्या चौथा स्तंभ?
लोकतंत्र में मीडिया को चौथा स्तंभ माना जाता है। यदि सार्वजनिक स्थल पर एक पत्रकार सुरक्षित नहीं है, तो आम नागरिक की सुरक्षा पर भी प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है। अब निगाहें प्रशासन और राजनीतिक नेतृत्व की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

