आपदा में अवसर! तेल संकट के बीच कालाबाज़ारी और वसूली का खेल शुरू?
कोरोना काल में भी कालाबाज़ारी का कई काला सच आया था सामने…
तेल संकट की आड़ में खेल बड़ा : एजेंसियों पर मनमानी, छापेमारी के नाम पर वसूली?…
भारत समाचार 24×7.net…
16 मार्च / 2026 / विशेष रिपोर्ट…
✍️शब्बीर हसन…
■ अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर…
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और Strait of Hormuz के आसपास हालात बिगड़ने की ख़बरों के बाद वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित होती दिख रही है। Iran, Israel और United States के बीच बढ़ते तनाव का असर सीधे पेट्रोलियम पदार्थों और गैस की क़ीमतों पर पड़ रहा है, जिससे बाज़ार में लगातार महंगाई बढ़ती जा रही है।
■ संकट के बीच कालाबाज़ारी का आरोप…
तेल और गैस की बढ़ती क़ीमतों के बीच कुछ एजेंसी संचालकों और बिचौलियों द्वारा मनमाने तरीक़े से पेट्रोलियम पदार्थों की कालाबाज़ारी किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। आरोप है कि संकट की इस स्थिति का फ़ायदा उठाकर कुछ लोग आम जनता की मजबूरी का लाभ उठा रहे हैं।
■ छापेमारी के नाम पर वसूली की चर्चा…
सूत्रों के अनुसार कुछ स्थानों पर प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा जांच और छापेमारी के नाम पर एजेंसियों से वसूली किए जाने की भी चर्चाएं सामने आ रही हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यदि ऐसा हो रहा है तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
■ बाज़ार में अनिश्चितता का माहौल…
बढ़ते अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण बाज़ार में भी अनिश्चितता का माहौल बन गया है। कई स्थानों पर पेट्रोल-डीज़ल और गैस की उपलब्धता को लेकर लोगों में आशंका देखने को मिल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो इसका असर आने वाले दिनों में आम उपभोक्ताओं और परिवहन क्षेत्र पर और अधिक पड़ सकता है।
■ सख़्त निगरानी की ज़रूरत…
ऐसे हालात में आवश्यक है कि संबंधित विभाग और प्रशासन बाज़ार पर सख़्त निगरानी रखें। यदि कहीं भी कालाबाज़ारी या अनियमितता सामने आती है तो उस पर तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि संकट की स्थिति में आम जनता को राहत मिल सके और व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे।
■ आम जनता पर दोहरी मार…
एक ओर अंतरराष्ट्रीय हालात के कारण तेल-गैस की क़ीमतें बढ़ रही हैं, वहीं दूसरी ओर कालाबाज़ारी और कथित वसूली की ख़बरें सामने आने से आम जनता पर दोहरी मार पड़ती दिखाई दे रही है। ऐसे में ज़रूरत है कि संबंधित विभाग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सख़्त कार्रवाई सुनिश्चित करे, ताकि संकट की घड़ी में जनता का शोषण न हो।
■ कोविड काल में भी दिखा था ‘आपदा में अवसर’ का चेहरा…
वैश्विक महामारी COVID-19 के दौर में भी कई लोगों ने आपदा को अवसर में बदलते हुए जमकर कालाबाज़ारी की थी। उस समय सैनिटाइज़र, मास्क और दवाइयों से लेकर ऑक्सीजन सिलेंडर तक की भारी कमी के बीच कई जगहों पर इन आवश्यक वस्तुओं को मनमाने दामों पर बेचे जाने की शिकायतें सामने आई थीं। इतना ही नहीं, वैक्सीन लगवाने के नाम पर भी कई स्थानों पर अवैध वसूली और फर्ज़ीवाड़े के मामले उजागर हुए थे। क्वारंटीन व्यवस्था और इलाज से जुड़े संसाधनों के बीच भी अनियमितताओं और मुनाफ़ाख़ोरी की चर्चाएं सामने आई थीं, जिसने संकट की घड़ी में व्यवस्था और मानवता दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।

