ख़ामोशी के ख़ंजर और सवालों की तलवार.. जहाँ लब ख़ामोश हो गए वहाँ शायरी बोल उठी, “सईद राही की ग़ज़ल:” सवाल, सन्नाटा और सच…
शायरी में छुपा सच, जो जवाब मांगता है… ख़ंजर से करो बात, ना तलवार से पूछो,मैं क़त्ल हुआ कैसे, मेरे यार से पूछो। फ़र्ज़ अपना मसीहा ने,अदा कर दिया लेकिन,किस…
