‘रोटी चाहिए, रहम नहीं’— बलरामपुर खदान बंदी के खिलाफ मजदूरों का बड़ा आंदोलन…
✊ खदान बचाओ – रोज़गार बचाओ की हुंकार…
बिश्रामपुर क्षेत्र की बलरामपुर कोयला खदान को बंद किए जाने के खिलाफ अब संघर्ष खुलकर सामने आ गया है। कोयला मजदूर सभा (एच.एम.एस.) ने खदान को पुनः सुचारु रूप से चालू करने की मांग को लेकर बड़ा आंदोलन छेड़ने का ऐलान कर दिया है।
🤝 आसपास की सभी ग्राम पंचायतों से मांगा गया समर्थन…
संगठन की ओर से केवल एक पंचायत तक सीमित न रहते हुए, बलरामपुर खदान से सटी सभी ग्राम पंचायतों के सरपंच, उपसरपंच एवं समस्त पंचों को भी ज्ञापन सौंपकर समर्थन मांगा गया है। कोयला मजदूर सभा ने स्पष्ट किया है कि यह मामला सिर्फ खदान या मजदूरों का नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की आजीविका और विकास से जुड़ा सवाल है, इसलिए जनप्रतिनिधियों का साथ बेहद जरूरी है।कोयला मजदूर सभा की ओर से समस्त ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधियों को लिखित पत्र सौंपते हुए साफ किया कि बलरामपुर खदान में लगभग 30 लाख टन कोयले का भंडार मौजूद है, जिसे सीमित संसाधनों और मशीनों के माध्यम से निकाला जा सकता है। इसके बावजूद खदान को जानबूझकर ठप कर दिया गया है।

⚠️ निजी ठेकेदारों पर गंभीर आरोप…
पत्र में आरोप लगाया गया है कि निजी ठेकेदारों द्वारा खदान में पानी भरकर उत्पादन रोका जा रहा है, जबकि यह खदान पहले भी 7–8 फीट की गहराई तक सफलतापूर्वक संचालित हो चुकी है। मजदूरों का कहना है कि यदि 4–6 पंप और एच.डी. मशीनें उपलब्ध करा दी जाएं, तो कोयला उत्खनन फिर से आसानी से शुरू किया जा सकता है।
👩👩👧👦 मजदूरों के साथ परिवार भी आंदोलन को तैयार…
यह लड़ाई सिर्फ मजदूरों की नहीं रही। पत्र में उल्लेख है कि मजदूरों की महिलाएं, बच्चे और पूरे परिवार अब इस आंदोलन में शामिल होने को तैयार हैं। रोज़गार पर संकट और क्षेत्र की आर्थिक रीढ़ टूटने से लोगों में जबरदस्त आक्रोश है।
🗓️ आंदोलन का पूरा रोडमैप घोषित…
कोयला मजदूर सभा ने चरणबद्ध आंदोलन का एलान करते हुए साफ कर दिया है कि:
9 जनवरी को एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन
16 जनवरी से क्रमिक भूख हड़ताल
23 जनवरी से आमरण अनशन
यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और उग्र होगा।
⏰ 9 जनवरी को शक्ति प्रदर्शन…
सभा ने जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नेतृत्व से अपील की है कि 9 जनवरी, शुक्रवार को सुबह 10 बजे होने वाले धरना प्रदर्शन में शामिल होकर खदान, मजदूर और क्षेत्र हित में एकजुटता दिखाएं।
🗣️ “यह लड़ाई रोटी-रोज़गार की है”
कोयला मजदूर सभा के महामंत्री देवेंद्र मिश्रा ने स्पष्ट कहा है कि यह संघर्ष किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि हजारों मजदूर परिवारों के भविष्य को बचाने की लड़ाई है। यदि अब भी आवाज़ नहीं सुनी गई, तो आंदोलन की चिंगारी बड़े जनांदोलन में बदल सकती है।

