ज़िला पंचायत सामान्य सभा में भ्रष्टाचार पर महाबहस…
रायपुर | बेमेतरा | नवागढ़…
विशेष रिपोर्ट…
ज़िला पंचायत की सामान्य सभा की बैठक इस बार विकास योजनाओं की समीक्षा से अधिक भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के गंभीर आरोपों के कारण सुर्ख़ियों में रही। सदस्यों ने एक के बाद एक मामलों को उठाते हुए कहा कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में DMF राशि जनता के हित के बजाय कमीशनखोरी का ज़रिया बन गई।
स्ट्रीट लाइट ख़रीदी में भारी गड़बड़ी…
नगर पंचायत मारो, पड़पोड़ी सहित जनपद क्षेत्रों में स्ट्रीट लाइट स्थापना को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए। सदस्यों ने बताया कि…
० घटिया गुणवत्ता की लाइट लगाई गई
० तय तकनीकी मानकों की अनदेखी हुई
० बाज़ार मूल्य से कई गुना अधिक क़ीमत पर भुगतान किया गया
चौंकाने वाली बात यह रही कि जिन वार्डों में लाइट लगी ही नहीं, वहां भी पूरा भुगतान कर दिया गया।
नवागढ़–साजा में टैंकर क्रय पर सवालों की बौछार…
नवागढ़ और साजा क्षेत्रों में टैंकर ख़रीदी को लेकर भी सभा में तीखी बहस हुई। आरोप है कि…
० आवश्यकता से अधिक दामों पर टैंकर ख़रीदे गए
० ख़रीदी प्रक्रिया पूरी तरह अपारदर्शी रही
० कई टैंकर या तो उपयोग में नहीं हैं या सिर्फ कागज़ों में चल रहे हैं
सदस्यों ने यह भी सवाल उठाया कि 15वें वित्त से पहले ही टैंकर ख़रीदे जा चुके थे, फिर दोबारा ख़रीदी की ज़रूरत क्यों पड़ी?
आरोप यह भी है कि ठेकेदार चयन में अपने ख़ास लोगों को लाभ पहुंचाया गया।
॥स्वामी आत्मानंद स्कूल में GYM सामग्री घोटाला…
शिक्षा के नाम पर किए गए ख़र्चों पर भी सवाल उठे। स्वामी आत्मानंद विद्यालय में GYM सामग्री ख़रीदी को लेकर आरोप लगाए गए कि…
० ज़रूरत से कहीं ज़्यादा क़ीमत पर सामग्री ख़रीदी गई…
० उपकरणों की गुणवत्ता बेहद ख़राब है
० कई मशीनें उपयोग योग्य ही नहीं हैं
सदस्यों ने इसे “दिखावटी विकास और असली भ्रष्टाचार” क़रार दिया।
॥परपोड़ी नगर पंचायत में LED लाइट मामला…
नगर पंचायत परपोड़ी में LED लाइट ख़रीदी और स्थापना में भी गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगा कि…
० कम गुणवत्ता की LED लगाई गई
० वारंटी और मेंटेनेंस शर्तों का पालन नहीं हुआ
० पहले भुगतान, बाद में काम का आरोप सामने आया
॥जनप्रतिनिधियों का सीधा आरोप –योजनाएं बनीं ‘कमाई की मशीन’…
सामान्य सभा में एक स्वर में कहा गया कि स्ट्रीट लाइट, टैंकर, GYM—हर योजना में एक ही पैटर्न है: महंगी ख़रीदी, घटिया सामान और कागज़ी खानापूर्ति। इससे प्रशासनिक निगरानी और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े होते है।
॥नए कलेक्टर और CEO ने जताई अनभिज्ञता…
जब मामले पर जवाब मांगा गया तो नए कलेक्टर और ज़िला पंचायत CEO ने खुद को पूर्व मामलों से अनभिज्ञ बताया।
सदस्यों ने इस जवाब को असंतोषजनक बताते हुए स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच की मांग की।
सूत्रों के अनुसार, DMF राशि से जुड़ी ये ख़रीदी तत्कालीन ADM/SDM प्रकाश भारद्वाज और पूर्व ज़िला पंचायत CEO टेकचंद अग्रवाल के कार्यकाल की बताई जा रही हैं, जिनमें 40% तक कमीशन के आरोप लगाए गए हैं।
॥जांच की मांग तेज़, कार्रवाई के संकेत…
बैठक के अंत में साफ हो गया कि ख़रीदी से जुड़े इन मामलों पर जांच का दबाव लगातार बढ़ेगा। यदि आरोप प्रमाणित होते हैं, तो आने वाले दिनों में कई अधिकारियों और ठेकेदारों पर बड़ी कार्रवाई तय मानी जा रही है।
📌 अंतिम संदेश…
जनता के पैसे से किए गए विकास कार्य अगर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ते रहे, तो जवाबदेही तय करना प्रशासन की सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी है। अब देखना होगा कि जांच सिर्फ कागज़ों तक सीमित रहती है या दोषियों तक पहुंचती है।

