भारत समाचार 24×7.net…
विशेष रिपोर्ट…
जीपीएम/अमरकंटक
मैकल पहाड़ों पर माफ़िया का क़ब्ज़ा…
छत्तीसगढ़–मध्यप्रदेश सीमा पर स्थित पवित्र अमरकंटक–मैकल क्षेत्र में अवैध उत्ख़नन माफ़िया बेलगाम हो चुका है। हरियाली और नदियों की जन्मस्थली अब ख़नन माफ़िया के आतंक की पहचान बनती जा रही है।
सच दिखाने की सज़ा…
8 जनवरी की शाम पत्रकार सुशांत गौतम मैकल पर्वत श्रृंखला में हो रहे अवैध उत्ख़नन की रिकॉर्डिंग कर लौट रहे थे। तभी धनौली क्षेत्र में माफ़िया ने उनकी गाड़ी को तीन वाहनों से घेर लिया। लोहे की रॉड से हमला कर उन्हें लहूलुहान कर दिया गया और सबूत मिटाने के लिए मोबाइल फोन भी लूट लिया गया।
नामज़द आरोपी, फिर भी बेख़ौफ…
इस मामले में FIR क्रमांक 0014/2026 दर्ज की गई है।
आरोपी—जयप्रकाश शिवदासानी (जेठू), सुधीर बाली, लल्लन तिवारी भारतीय न्याय संहिता की गंभीर धाराओं में मामला दर्ज होने के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होना कई सवाल खड़े करता है।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल…
मरवाही वनमंडल की रिपोर्ट में पमरा क्षेत्र में बायोस्फियर रिजर्व के भीतर नियमों की खुली अवहेलना दर्ज है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद भारी मशीनें और धमाके जारी हैं, लेकिन खनिज विभाग की कार्रवाई नदारद है।
क़लम नहीं झुकेगी…
जानलेवा हमले के बाद भी पत्रकार सुशांत गौतम का साफ संदेश है। “यह हमला उनकी घबराहट है, सच से डर है। मैकल की बर्बादी का सच अब नहीं रुकेगा। ”यह बयान बताता है कि हमला पत्रकार पर नहीं, बल्कि स्वतंत्र पत्रकारिता पर था।
अब आर-पार की लड़ाई…
यदि आज एक पत्रकार को सच दिखाने पर पीटा जा सकता है, तो कल आम नागरिक भी सुरक्षित नहीं रहेगा। अमरकंटक जैसे पवित्र क्षेत्र में अब सवाल यह है—क़ानून चलेगा या माफ़िया?

