शब-ए-बारात की छुट्टी बनी आख़िरी सफ़र, डैम ने निगल लिए दो बच्चे, चीखें पानी में डूब गईं, मासूम लौटे कफ़न में…
भारत समाचार 24×7.net…
विशेष रिपोर्ट…
✍️शब्बीर हसन…
सूरजपुर | रामनगर 9 फरवरी 2026
सूरजपुर ज़िले के ग्राम पंचायत रामनगर स्थित डैम एक बार फिर मौत का कुंड साबित हुआ। रविवार दोपहर नहाने गए सात बच्चों में से दो मासूम गहरे पानी में डूब गए थे। अंधेरा और ठंड का हवाला देकर कल रेस्क्यू स्थगित किया गया था, लेकिन आज सुबह जो हुआ उसने प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

कल हुआ हादसा, रात भर इंतज़ार…
रविवार दोपहर क़रीब 2:30 बजे नहाने गए बच्चों में से दो बच्चे अचानक गहरे पानी में समा गए। साथ मौजूद बच्चों ने शोर मचाया, परिजन और ग्रामीण मौक़े पर पहुंचे। विश्रामपुर थाना पुलिस और एसडीआरएफ टीम ने शाम 5:30 बजे रेस्क्यू शुरू किया, लेकिन अंधेरा, ठंड और संसाधनों की कमी बताकर रात में अभियान स्थगित कर दिया गया।
सुबह 5 बजे पहला शव बरामद…
बुधवार सुबह क़रीब 5 बजे परिजनों और ग्रामीणों की मदद से डैम के पास से पहला शव बाहर निकाला गया। मृतक की पहचान 11 वर्षीय आदिल के रूप में हुई, जो मनेंद्रगढ़ से शब-ए-बारात की छुट्टी में रिश्तेदारों के यहां आया था। मासूम का शव देखते ही परिजनों में कोहराम मच गया।


एसडीआरएफ की बड़ी टीम, लेकिन नतीजा शून्य…
इसके बाद एसडीआरएफ की बड़ी टीम मौक़े पर पहुंची। नाव, कैमरा, ऑक्सीजन सिलेंडर समेत तमाम आधुनिक संसाधनों के साथ घंटों तक तलाश जारी रही, लेकिन दूसरा शव नहीं मिल सका। कल से लेकर आज तक क़रीब 7–8 घंटे तक सिस्टम कोशिश करता रहा, नतीजा शून्य रहा।
बिना ऑक्सीजन उतरा जांबाज़, 7 मिनट में निकाल लायाशव…
इसी दौरान ग्रामीणों ने पास के गांव से राजेश राजवाड़े नामक एक अनुभवी तैराक को बुलाया, जिन्हें इस तरह के रेस्क्यू में महारत हासिल है। राजेश बिना किसी ऑक्सीजन या आधुनिक उपकरण के डैम में उतरा। पांचवीं डुबकी में मात्र 7 से 8 मिनट के भीतर उन्होंने दूसरे बच्चे का शव बाहर निकाल लिया। यह दृश्य वहां मौजूद हर आंख को नम कर, प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर गया।

सिस्टम पर सवाल, जांबाज़ी पर सलाम…
जहां एक ओर आधुनिक संसाधनों से लैस प्रशासन घंटों में नाक़ाम रहा, वहीं एक स्थानीय तैराक ने चंद मिनटों में वह कर दिखाया, जो सिस्टम नहीं कर पाया। यह घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक तैयारी, प्रशिक्षण और ज़मीनी सच्चाई के बीच गहरी खाई को उजागर करती है।

डैम पहले भी जानलेवा, फिर भी लापरवाही…
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह डैम पहले भी हादसों के लिए कुख़्यात रहा है, बावजूद इसके—डैम को प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित नहीं किया गया, चेतावनी बोर्ड नहीं लगाए गए, कोई स्थायी सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई, हर बार की तरह इस बार भी क़ीमत मासूम जिंदगियों ने चुकाई।

पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए शव…
दोनों बच्चों के शव बरामद होने के बाद पुलिस ने पंचनामा कार्रवाई कर शवों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिश्रामपुर, ज़िला सूरजपुर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मौक़े पर मौजूद सैकड़ों लोगों की आंखें नम थीं, माहौल ग़मगीन और आक्रोश से भरा हुआ था।

पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंपे गए शव…
पोस्टमार्टम प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों मृत बच्चों आदिल (11 वर्ष) और अयान (15 वर्ष ) के शव उनके परिजनों को सौंप दिए गए। जानकारी के अनुसार, अयान स्थानीय ग्रामवासी था, जबकि 11 वर्षीय आदिल मनेंद्रगढ़ से छुट्टियों में यहां आया हुआ था। आज शाम अयान का अंतिम संस्कार जयनगर क़ब्रिस्तान व आदिल को बिश्रामपुर स्थित क़ब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-ख़ाक़ किया जाएगा। दोनों गांवों में मातम का माहौल है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

अब भी अनुत्तरित सवाल…
क्या डैम पर सुरक्षा इंतज़ाम समय रहते किए गए होते तो जान बच सकती थी?
क्या स्थानीय दक्ष (राजेश जैसे) तैराकों को आपदा प्रबंधन से जोड़ा जानाचाहिए?
क्या हर हादसे के बाद सिर्फ जांच का आश्वासन ही मिलेगा?
इन सवालों के जवाब अब भी डैम के गहरे पानी की तरह अंधेरे में हैं।

