ख़ामेनेई के शहादत से उठा तूफ़ान: हक़ और इंसानियत का परचम और बुलंद,, देशभर में कैंडल मार्च निकालकर सुप्रीम लीडर को दी श्रद्धांजलि,,इंसाफ़ की राह पर चलने का दोहराया संकल्प…

ख़ामोशी, टूटी, इंक़लाब गूंजा: शहादत के बाद जोश दोगुना…

भारत समाचार 24×7.net…

विशेष रिपोर्ट…

✍️शब्बीर हसन…

सूरजपुर |मानपुर | 1 मार्च | 2026

दर्द भरी सुबह, नम आंखें और सन्नाटा…

रविवार की सुबह जैसे ही लोगों ने मोबाइल और टीवी स्क्रीन खोली, ख़ासकर शिया समुदाय के दिलों में अजीब सा सन्नाटा छा गया। ऐसा लगा मानो पैरों तले ज़मीन खिसक गई हो और आसमान पर काला बादल छा गया हो। यह सिर्फ एक ख़बर नहीं थी, बल्कि एक एहसास था—वही एहसास जो 1400 साल पहले करबला की तपती रेत पर महसूस हुआ था, जब इमाम हुसैन ने ज़ुल्म के आगे सिर झुकाने से इंकार कर बेमिसाल क़ुर्बानी पेश की थी। जी हां हम बात कर रहे हैं ईरान के सुप्रीम लीडर “सैयद अली ख़ामेनेई” की जिन्हें इज़राईल और अमेरिका द्वारा बम व मिसाइल हमले में शहीद कर दिया गया।

करबला का संदेश: सत्ता नहीं, इंसानियत सबसे ऊपर…

करबला की जंग सत्ता की नहीं, उसूलों की जंग थी। लाखों के लश्कर के सामने केवल 72 लोग—लेकिन इरादा ऐसा कि इतिहास भी झुक गया। दौलत, हुक़ूमत और समझौते के हर प्रस्ताव को ठुकराते हुए इमाम हुसैन ने बता दिया कि सच्चा रास्ता वही है, जिसमें इंसानियत की हिफाज़त हो। उन्होंने अपने छह माह के मासूम तक की परवाह किए बिना यह साबित किया कि जब बात सच और इंसाफ की हो, तो क़ुर्बानी ही सबसे बड़ी जीत होती है।

आज का दौर और प्रतिरोध की आवाज़…

इसी करबला के पैग़ाम को आगे बढ़ाने वालों में ईरान के सुप्रीम लीडर “शहीद”-“सैयद अली ख़ामेनेई ” का नाम भी शिद्दत से लिया जायेगा। उनके समर्थकों का कहना है कि उन्होंने भी दुनिया की बड़ी ताक़तों के सामने झुकने के बजाय अपने उसूलों को प्राथमिकता दी। उनके जीवन और संघर्ष को याद करते हुए लोगों ने यही कहा—“हुसैनियत किसी एक दौर की कहानी नहीं, बल्कि हर युग की आवाज़ है।” और उनकी यह बेमिसाल क़ुर्बानी  हमेशा याद रखी जाएगी।

मानपुर में उठी इंसानियत की मशाल…

छत्तीसगढ़ के सूरजपुर ज़िले अंतर्गत ग्राम मानपुर में “शिया समुदाय” ने कैंडल मार्च और मशाल जुलूस निकालकर इंसानियत के समर्थन में एकजुटता दिखाई। इमामबाड़े से करबला तक निकला यह जुलूस सिर्फ शोक नहीं, बल्कि एक ऐलान था—
“तुम कितने हुसैनी मारोगे, हर घर से एक हुसैन निकलेगा!”
औरतें, बच्चे, बुज़ुर्ग और नौजवान—सबके हाथों में जलती मशालें या मोमबत्तियां थीं और दिलों में एक ही जज़्बा—इंसाफ और अमन।

इंसानियत ज़िंदाबाद: एक अमर पैग़ाम…

इस जुलूस ने यह संदेश दिया कि हुसैन किसी एक मज़हब के नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिये हैं। करबला की रेत से उठी आवाज़ आज भी गूंज रही है—ज़ुल्म के ख़िलाफ खड़े हो जाओ, चाहे हालात कितने भी मुश्किल क्यों न हों।
यह सिर्फ श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि आने वाली नस्लों के लिए एक वसीयत है— धर्म से ऊपर इंसानियत, सत्ता से ऊपर सच, और डर से ऊपर हिम्मत। जब तक दुनिया में एक भी इंसान अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाता रहेगा, तब तक करबला ज़िंदा रहेगी और हर दौर में एक हुसैन जन्म लेता रहेगा।

“बच्चे हों या बूढ़े, औरतें हों या मर्द—हर आंख नम थी…

ईरान के सुप्रीम लीडर “सैयद अली ख़ामेनेई” की शहादत की ख़बर ने ऐसा दर्द फैलाया कि बच्चे हों या बूढ़े, औरतें हों या मर्द—हर आंख नम दिखाई दी। गलियों से लेकर इबादतगाहों तक सन्नाटा और सिसकियाँ एक साथ सुनाई दीं। लोगों ने इसे केवल एक नेता का जाना नहीं, बल्कि अपने रहनुमा, अपने मार्गदर्शक और अपनी उम्मीद की रौशनी के बुझ जाने जैसा बताया। कई जगह दुआएँ की गईं, मोमबत्तियाँ जलाई गईं और इंसाफ़ की पुकार बुलंद हुई। शोक में डूबे चेहरों पर ग़म के साथ-साथ यह जज़्बा भी साफ दिखा कि वे अपने नेता (रहबर ए मोअज़्ज़म ) की बताई राह—सब्र, हक़ और इंसानियत—को ज़िंदा रखेंगे।

“हौसले हुए फ़ौलादी: शहादत ने जगा दी इंक़लाबी चिंगारी!”

“इस शहादत के बाद हौसले टूटे नहीं, और बुलंद हो गए हैं। “Ali Khamenei” के नाम पर उठती हर सदा अब सिर्फ एक शख्सियत की नहीं, बल्कि उस विचार की है जो इंसानियत का पैग़ाम देता है। “इमाम हुसैन”—जो किसी एक मज़हब के नहीं, बल्कि पूरी मानवता के प्रतीक हैं—उनके मानने वाले धर्म, जाति और सरहदों से ऊपर उठकर खड़े हैं। मक़सद नेक हो तो चाहने वाले तलाश नहीं किए जाते, वे खु़द चलकर उस परचम तक पहुंचते हैं, जहां धर्म, जाति, संप्रदाय से हटकर सिर्फ इंसानियत को प्राथमिकता दी जाती है, आज भारतवर्ष में हक़, इंसानियत और इस्लाम का परचम पहले से कहीं ज़्यादा जोश, जुनून और इनक़लाबी तेवर के साथ बुलंद हो रहा है।”

हुसैनी उसूलों की सौगंध, ज़ुल्म के खिलाफ़ आवाज़ बुलंद…

भारत के विभिन्न राज्यों—बिहार, बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और हैदराबाद समेत कई शहरों में लोगों ने कैंडल मार्च निकालकर ईरान के सुप्रीम लीडर  “शहीद “-“सैयद अली खा़मेनेई “को श्रद्धांजलि अर्पित की।

हाथों में मोमबत्तियाँ और दिलों में ग़म लिए लोगों ने इंसानियत, अमन और न्याय की राह पर चलने का संकल्प दोहराया। इस मौके़ पर उपस्थित जनसमूह ने इमाम हुसैन के नक्शे-क़दम पर चलने, हर ज़ुल्म के ख़िलाफ़ डटकर खड़े रहने और सच की राह से कभी पीछे न हटने की शपथ ली। माहौल भावुक भी था और जोशीला भी—जहाँ हर शख़्स ने यह क़सम खाई कि इंसाफ़ और हक़ की आवाज़ को हमेशा ज़िंदा रखेंगे, चाहे हालात कितने भी कठिन क्यों न हों।

भारत ने आज एक अच्छा दोस्त खो दिया…

यह जुमला सिर्फ एक पंक्ति नहीं, बल्कि उन लोगों के दिल की आवाज़ बनकर उभरा है जो ईरान के सुप्रीम लीडर “सैयद अली खामेनेई” को दोनों देशों के रिश्तों की एक अहम कड़ी मानते थे। उनके समर्थकों का कहना है कि यह क्षति केवल ईरान की नहीं, बल्कि उन तमाम मुल्क़ों की है जो उन्हें एक मज़बूत, स्पष्टवादी और वैचारिक नेतृत्व के प्रतीक के रूप में देखते थे। भारत और ईरान के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और कूटनीतिक संबंधों के संदर्भ में भी इस घटना को एक भावनात्मक झटका बताया जा रहा है। लोगों की राय में यह केवल एक शख़्सियत का जाना नहीं, बल्कि दोस्ती, संवाद और साझा विरासत के एक दौर का अंत जैसा महसूस हो रहा है—जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा।

ईरान के सर्वोच्च नेता की हत्या पर कांग्रेस का कड़ा बयान…

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आईएनसी) ने ईरान के सर्वोच्च नेता सैयद अली हुसैनी ख़ामेनेई की सैन्य हमले में हुई लक्षित हत्या की कड़ी निंदा की है। पार्टी ने कहा कि बिना औपचारिक युद्ध घोषणा के इस तरह की कार्रवाई बेहद चिंताजनक है। कांग्रेस ने इस दुखद घड़ी में उनके परिवार, ईरान की जनता और दुनिया भर के शिया समुदाय के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है और कहा है कि वह इस कठिन समय में उनके साथ खड़ी है।
कांग्रेस ने कहा कि भारत की विदेश नीति हमेशा बातचीत के ज़रिए विवाद सुलझाने और अंतरराष्ट्रीय क़ानून का सम्मान करने पर आधारित रही है। भारत का संविधान भी शांति, समानता और दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने की बात करता है। पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव इन मूल्यों के ख़िलाफ़ है। “वसुधैव कुटुंबकम्” यानी पूरी दुनिया एक परिवार है, महात्मा गांधी का अहिंसा का संदेश और जवाहरलाल नेहरू की गुटनिरपेक्ष नीति – ये सभी शांति और संतुलन की बात करते हैं। पार्टी ने कहा कि किसी भी संप्रभु देश के नेतृत्व को कमज़ोर करने के लिए ताक़त का इस्तेमाल करना ग़लत है। यह संयुक्त राष्ट्र के नियमों के भी ख़िलाफ़ है, जो किसी देश की सीमा और राजनीतिक स्वतंत्रता का सम्मान करने की बात करते हैं। किसी मौजूदा राष्ट्राध्यक्ष की हत्या अंतरराष्ट्रीय क़ानून के मूल सिद्धांतों के ख़िलाफ़ है। संप्रभुता कोई शर्तों पर मिलने वाली चीज़ नहीं है और राजनीतिक वैधता ताक़त के दम पर नहीं बनाई जा सकती। कांग्रेस ने दोहराया कि हर देश के लोगों को अपने राजनीतिक भविष्य का फैसला खु़द करने का अधिकार है। कोई भी बाहरी ताक़त किसी देश की सरकार बदलने या उसका नेतृत्व तय करने का हक़ नहीं रखती। ऐसे क़दम अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और शांति के लिए ठीक नहीं हैं।

“मल्लिकार्जुन खड़गे”
{अध्यक्ष, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस}

सूरजपुर उस वक़्त नारों की गूंज से थर्रा उठा…

जैसे ही इस कैंडल मार्च का आग़ाज हुआ इज़राइल और अमेरिका के ख़िलाफ मुर्दाबाद के नारे लगे और साथ ही “Ali Khamenei” ज़िंदाबाद तथा हिंदुस्तान ज़िंदाबाद की सदायें आसमान तक पहुंची। बच्चे, नौजवान और बुज़ुर्ग —हर उम्र के लोगों ने जोश और जज़्बे के साथ हिस्सा लिया। सूरजपुर के ग्राम मानपुर स्थित इमामबारगाह से शुरू हुआ कैंडल मार्च लगभग एक किलोमीटर की दूरी तय कर करबला पहुंचकर संपन्न हुआ।

इस जुलूस में मानपुर कमेटी के सदर शबाब हुसैन उर्फ लड्डू, युवा कांग्रेस सूरजपुर के ज़िला उपाध्यक्ष ज़फर हैदर, हैदर अली, दानिश हुसैन, भारत समाचार के संपादक शब्बीर हसन, रेहान अली, रेहान हैदर, तसउवर हुसैन, पिंटू भाई, छोटू भाई, सज्जाद हुसैन, क़ासिम अली, नसीम हैदर, क़ैसर हुसैन, शानू भाई, नौशाद हुसैन, इस्तेयाक़ भाई, कौसर हुसैन, अफ़सर हुसैन, गुड्डू भाई एवं मौलाना ज़फर रज़ा सहित सैकड़ो लोग शामिल रहे।

By Gulam Shabbir Hasan

Journalist | News Reporter | Content Creator Gulam Shabbir Hasan is an experienced Indian journalist associated with Bharat Samachar and Hamari Sarkar Daily Newspaper. With a strong background in news reporting, field coverage, and investigative journalism, he is dedicated to delivering accurate, unbiased, and timely news to the public. He specializes in news writing, reporting, and interviews, with a keen ability to connect with people through strong communication and public interaction skills. Alongside traditional journalism, he is actively involved in social media content creation, ensuring news reaches a wider digital audience. Fluent in Hindi, English, and Urdu, Gulam Shabbir Hasan brings linguistic versatility and cultural sensitivity to his reporting. Beyond journalism, he has a deep interest in singing, poetry, and ghazals, which reflects his creative and expressive personality. 📍 Location: Surajpur, Chhattisgarh 📞 Contact: +91 83197 69851 | +91 99261 91754 📧 Email: shabbirhasan512@gmail.com

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