ईरान-इज़रायल टकराव पर जी.डी. बख़्शी का सवाल — यूक्रेन में शांति की अपील, यहां ख़ामोशी क्यों?
भारत की संतुलन की नीति, दोनों देशों से गहरे रिश्ते…
भारत समाचार 24×7.net…
विशेष रिपोर्ट…
✍️शब्बीर हसन…
अंतर्राष्ट्रीय डेस्क, 5 मार्च 2026…
रक्षा विशेषज्ञ और रिटायर्ड मेजर जनरल G. D. Bakshi ने Iran-Israel और United States के बीच बढ़ते तनाव पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि भारत के लिए स्थिति बेहद संवेदनशील है, क्योंकि ईरान भी भारत का पुराना सहयोगी रहा है और इज़रायल भी रक्षा व तकनीक के क्षेत्र में एक अहम रणनीतिक साझेदार है। ऐसे में भारत किसी एक पक्ष का खुलकर समर्थन करने की स्थिति में नहीं है।
ऊर्जा संकट का ख़तरा, तेल और गैस सप्लाई पर असर…
बख़्शी के अनुसार भारत को लंबे समय तक सस्ता तेल ईरान से मिलता रहा, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण यह बंद करना पड़ा। इसके बाद भारत ने Russia से तेल ख़रीदना शुरू किया, जिस पर भी पश्चिमी दबाव बढ़ा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि खाड़ी क्षेत्र में युद्ध तेज़ हुआ तो भारत के सैकड़ों तेल टैंकर फंस सकते हैं, समुद्री मार्ग बाधित हो सकते हैं और क़तर से आने वाली गैस सप्लाई भी प्रभावित हो सकती है। इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।
तकनीक में इज़रायल, ऊर्जा में ईरान का महत्व…
मेजर जनरल बख्शी ने कहा कि इज़रायल भारत को मिसाइल तकनीक, रक्षा उपकरण और कई आधुनिक इनोवेशन उपलब्ध कराता है, जबकि ईरान भारत की ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाता रहा है। ऐसे में दोनों देशों के बीच युद्ध भारत के रणनीतिक और आर्थिक हितों को एक साथ प्रभावित कर सकता है।
यूक्रेन युद्ध में शांति अपील, यहां क्यों ख़ामोशी?…
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब Ukraine और Russia के बीच युद्ध शुरू हुआ था, तब भारत ने वहां शांति की अपील और कूटनीतिक पहल की थी। ऐसे में अब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भी शांति की पहल होनी चाहिए। उनका कहना है कि अगर समय रहते बातचीत और कूटनीति के ज़रिए समाधान नहीं निकाला गया तो यह संघर्ष और बड़े क्षेत्रीय संकट का रूप ले सकता है।
युद्ध बढ़ा तो भारत को भारी आर्थिक झटका…
बख़्शी ने साफ कहा कि इस युद्ध का सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था, तेल-गैस आपूर्ति, व्यापारिक मार्ग और वैश्विक बाज़ारों पर पड़ सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि हालात जल्दी नहीं संभले तो महंगाई, ऊर्जा संकट और व्यापारिक नुकसान जैसे कई गंभीर परिणाम भारत को झेलने पड़ सकते हैं। इसलिए भारत को शांति और कूटनीति की दिशा में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

