2025: एक ऐसा साल जिसने सवाल ज़्यादा छोड़े, जवाब कम…

विशेष संपादकीय…

भारतसमाचार24×7.net…

आज जब कैलेंडर का आख़िरी पन्ना पलटने को है, तो साल 2025 भी इतिहास की फ़ाइल में दर्ज होने जा रहा है। यह साल किसी के लिए मुस्कान बनकर आया, तो किसी के हिस्से सिर्फ़ सब्र और सिसकियाँ छोड़ गया।

“कुछ को मुक़म्मल जहाँ मिला इस साल,
    किसी की दुनिया उजड़ गई होगी…”

प्रिय घटनाएँ: जब उम्मीदों ने साँस ली…

2025 में देश और दुनिया ने कई ऐसे पल देखे, जहाँ इंसानियत ने ज़ख़्मों पर मरहम रखा। कहीं विकास परियोजनाओं ने रोज़गार की राह खोली, कहीं खिलाड़ियों ने तिरंगे को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। विज्ञान, तकनीक और शिक्षा के क्षेत्र में नए कीर्तिमान बने, ग्रामीण अंचलों तक योजनाओं की पहुँच ने कई ज़िंदगियों को नया सहारा दिया।

  “थकी हुई आँखों में जब ख़्वाब लौटे,
तब लगा कि साल पूरी तरह बुरा नहीं था…”

अप्रिय घटनाएँ: जब वक़्त ने इम्तिहान लिया…

लेकिन 2025 ने सिर्फ़ फूल नहीं दिए, काँटों से भी रूबरू कराया। कहीं प्राकृतिक आपदाओं ने घर-बार उजाड़ दिए तो कहीं बेरोज़गारी और महँगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ दी, कहीं रिश्तों में अविश्वास और समाज में असंवेदनशीलता बढ़ी, तो कहीं मासूमों की आँखों में डर और बुज़ुर्गों के चेहरों पर चिंता साफ़ दिखी।

“कुछ हादसे ऐसे थे जो सवाल बन गए,
 इंसानियत आज भी ज़िंदा है या नहीं…”

समाज का आईना बना 2025…

2025 सिर्फ़ एक साल नहीं था, यह सिस्टम, समाज और सत्ता—तीनों की परीक्षा थी।

“साल बदला, चेहरे बदले, मगर आम आदमी की तक़दीर नहीं बदली…”

जहाँ एक ओर विकास के दावे मंचों से गूंजते रहे, वहीं दूसरी ओर ज़मीनी हक़ीक़त भूख, बेरोज़गारी और लाचारी में सिमटी रही। योजनाएँ बनीं, लेकिन कई ज़रूरतमंद तक नहीं पहुँचीं, आँकड़े चमके, लेकिन झोपड़ियों का अँधेरा नहीं हटा, भाषणों में संवेदना थी, पर फैसलों में सख़्ती ही दिखी।

“तू गुज़र गया 2025,
मगर पीछे सवाल छोड़ गया—
क्या सच में इंसान सबसे ऊपर है?”

2025 ने सिखाया…

सिस्टम तब तक सफल नहीं जब तक आख़िरी इंसान मुस्कुराए नहीं, यह साल सत्ता से ज़्यादा जवाबदेही माँगता रहा, लेकिन जवाब अक्सर फ़ाइलों में दबे रह गए। यह साल हमें यह सिखा गया कि, तरक़्क़ी सिर्फ़ इमारतों से नहीं होती, बल्कि सोच, संवेदना और ज़िम्मेदारी से होती है।

   “हमने सड़कें तो चौड़ी कर लीं,
काश दिलों के रास्ते भी खुल जाते…”

आने वाला वर्ष 2026: उम्मीदों की दहलीज़ पर खड़ा है, कल आने वाला साल क्या लेकर आएगा, यह कोई नहीं जानता, लेकिन इतिहास गवाह है, हर नया साल एक मौक़ा होता है। बीते साल की ग़लतियों से सीखने का टूटे हुए भरोसे को जोड़ने का, नफ़रत के शोर में मोहब्बत की आवाज़ बनने का

  “नया साल कोई चमत्कार नहीं लाता, मगर नया सोचने का हौसला ज़रूर देता है…”

विदाई की पंक्तियाँ…

कुछ यादें, कुछ आँसू और ढेर सारी ख़ामोश प्रार्थनाएँ, 2025 के जाते-जाते कई घरों में तस्वीरों के आगे दिया जलता रहा, कई माँओं की दुआ अधूरी रही, और कई बच्चों ने बहुत जल्दी बड़ा होना सीख लिया।

“किसी ने अपनों को खोया,
     किसी ने ख़ुद को…”

यह साल हमें यह अहसास दिला गया कि, हर मुस्कुराते चेहरे के पीछे एक अनकही कहानी होती है। किसी ने संघर्ष में भी उम्मीद नहीं छोड़ी, किसी ने टूटकर भी किसी का हाथ नहीं छोड़ा, किसी ने ख़ामोशी को ही अपनी आवाज़ बना लिया।

“2025 ने हमें रोना नहीं सिखाया, बल्कि रोते हुए जीना सिखाया…”

जब 2025 विदा हो रहा है,तो वह हमसे कोई वादा नहीं माँगता, बस एक उम्मीद छोड़ जाता है…

“अगले साल,
थोड़े ज़्यादा इंसान बनना…”

  2025,
तुमने रुलाया भी,
तुमने हँसाया भी।
तुम्हारी हर सीख,
अब हमारे कल की राह बने।

“अलविदा ऐ साल,
  तू जैसा भी था,
  हमें थोड़ा और इंसान बना गया…”

     अलविदा 2025 अलविदा……😭😭😭

          ✍️शब्बीर हसन…..

By Gulam Shabbir Hasan

Journalist | News Reporter | Content Creator Gulam Shabbir Hasan is an experienced Indian journalist associated with Bharat Samachar and Hamari Sarkar Daily Newspaper. With a strong background in news reporting, field coverage, and investigative journalism, he is dedicated to delivering accurate, unbiased, and timely news to the public. He specializes in news writing, reporting, and interviews, with a keen ability to connect with people through strong communication and public interaction skills. Alongside traditional journalism, he is actively involved in social media content creation, ensuring news reaches a wider digital audience. Fluent in Hindi, English, and Urdu, Gulam Shabbir Hasan brings linguistic versatility and cultural sensitivity to his reporting. Beyond journalism, he has a deep interest in singing, poetry, and ghazals, which reflects his creative and expressive personality. 📍 Location: Surajpur, Chhattisgarh 📞 Contact: +91 83197 69851 | +91 99261 91754 📧 Email: shabbirhasan512@gmail.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Missed