बरसात गई, गड्ढे रह गए: शंकरगढ़–बासेन मार्ग पर हर सफर बना जानलेवा…
सड़क पर बने ‘मौत के कुएं’, हादसे को खुला न्योता…
भारत समाचार 24×7.net…
Special report…
बलरामपुर/विजय सिंह…
बलरामपुर जिले के शंकरगढ़–बासेन मुख्य मार्ग पर प्रशासनिक लापरवाही अब आम जनता की जान के लिए सीधा खतरा बन चुकी है। इस सड़क पर बने विशालकाय गड्ढे किसी भी वक्त बड़े हादसे को दावत दे रहे हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि शासन–प्रशासन अब तक गहरी नींद में सोया हुआ नजर आ रहा है।
🚧 कहां और कैसी है समस्या…
शंकरगढ़ से लगभग 10–12 किलोमीटर दूर ग्राम पटना (भंडारपारा) के पास सड़क की हालत बेहद भयावह हो चुकी है। बरसात के दौरान सड़क पर 8 से 10 फीट तक गहरे गड्ढे बन गए, जो आज भी उसी हालत में मौजूद हैं। ये गड्ढे अब सड़क नहीं बल्कि ‘मौत के कुएं’ बन चुके हैं।
⏳ बरसात खत्म, इंतज़ार जारी…
बरसात समाप्त हुए पूरे 5 महीने बीत चुके हैं, लेकिन न तो सड़क की मरम्मत हुई और न ही किसी जिम्मेदार अधिकारी ने मौके पर झांकना जरूरी समझा। सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है, तभी उसकी नींद खुलेगी?
⚠️ हादसे की आशंका, डर के साये में सफर…
इस मार्ग से रोजाना स्कूली बच्चे, ग्रामीण, बाइक सवार, साइकिल सवार और भारी वाहन गुजरते हैं। रात के समय या बारिश के बाद पानी भर जाने पर ये गड्ढे दिखाई तक नहीं देते, जिससे किसी भी पल जानलेवा दुर्घटना हो सकती है।

📜 कानून व्यवस्था पर भी सवाल…
सड़क सुरक्षा को लेकर शासन के सख्त नियम और कानून सिर्फ कागजों तक सीमित नजर आ रहे हैं। नियमों की धज्जियां खुलेआम उड़ रही हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग मूकदर्शक बना बैठा है। क्या सड़क हादसों की जिम्मेदारी लेने के लिए कोई तैयार है?
❗ प्रशासन से सीधा सवाल…
क्या किसी की जान जाने के बाद ही कार्रवाई होगी?
क्या विकास की बातें सिर्फ मंचों तक सीमित हैं?
अब भी वक्त है कि शासन–प्रशासन नींद से जागे और इस ‘मौत के रास्ते’ को तुरंत दुरुस्त करे।
📢 जनता की मांग…
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से तत्काल सड़क मरम्मत, चेतावनी बोर्ड लगाने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में कोई बड़ा हादसा न हो।
🧾 निष्कर्ष…
अगर अब भी इस ओर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह लापरवाही किसी बड़ी त्रासदी में बदल सकती है। शासन–प्रशासन को चाहिए कि वह तुरंत संज्ञान लेकर इस जानलेवा सड़क को सुरक्षित बनाए, वरना सवाल सिर्फ सड़क का नहीं, सिस्टम की संवेदनहीनता का होगा।

