कचरे से जूझ रहा वार्ड 12, नाराज़ लोगों ने दी आंदोलन की चेतावनी…
भारत समाचार 24×7.net…
विशेष रिपोर्ट…
शब्बीर हसन…
बिश्रामपुर। 13 मार्च 2026 / कोयलांचल नगरी बिश्रामपुर के वार्ड क्रमांक 12 में इन दिनों गंदगी का अंबार लगा हुआ है। वार्ड के कई हिस्सों में जगह-जगह कचरे के ढेर दिखाई दे रहे हैं, जिससे आसपास के वातावरण में बदबू और अस्वच्छता फैल रही है। इस स्थिति से वार्डवासी बेहद परेशान हैं और नगर पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।

■ गंदगी से बढ़ा बीमारी का ख़तरा…
स्थानीय लोगों का कहना है कि खुले में पड़े कचरे के कारण इलाके में मच्छरों और मक्खियों की संख्या तेज़ी से बढ़ गई है। इससे डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियों का ख़तरा भी मंडरा रहा है। वहीं कचरे को आवारा पशु खाने लगे हैं, जिससे उनके बीमार होने की आशंका भी बनी हुई है।

■ चुनावी वादे हुए हवा…
वार्डवासियों का आरोप है कि चुनाव के समय जनप्रतिनिधियों ने साफ-सफाई और बेहतर व्यवस्था के बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन अब उन वादों पर अमल होता नज़र नहीं आ रहा है। नगर पंचायत द्वारा सफाई कार्य के लिए निविदा जारी किए जाने के बावजूद ज़मीनी स्तर पर सफाई व्यवस्था ढीली दिखाई दे रही है।

■ सिर्फ वार्ड 12 ही नहीं, पूरे क्षेत्र में सफाई व्यवस्था सवालों के घेरे में…
वार्डवासियों का कहना है कि समस्या केवल वार्ड क्रमांक 12 तक सीमित नहीं है। चाहे नगर पंचायत बिश्रामपुर हो, नगर पंचायत शिवनंदनपुर हो या आसपास की ग्राम पंचायतें—अधिकांश जगहों पर सफाई व्यवस्था की हालत लगभग एक जैसी दिखाई देती है। लोगों का सवाल है कि जब जनप्रतिनिधि चुनाव के समय मैदान में उतरते हैं तो साफ-सफाई, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन जीतने के बाद वही वादे क्यों भुला दिए जाते हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि गंदगी के कारण सैकड़ों तरह की बीमारियों का ख़तरा बढ़ रहा है और कमज़ोर इम्युनिटी वाले लोग गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। इसके बावजूद ज़िम्मेदारों की चुप्पी और उदासीनता लोगों के मन में यह सवाल खड़ा कर रही है कि आखिर जनता की सेहत और बुनियादी सुविधाओं को लेकर जनप्रतिनिधियों की ज़िम्मेदारी कब निभाई जाएगी।

■ जल्द समाधान नहीं तो आंदोलन की चेतावनी…
स्थानीय लोगों ने नगर पंचायत से तत्काल सफाई अभियान चलाकर नियमित कचरा उठाव और स्वच्छता व्यवस्था बहाल करने की मांग की है। वार्डवासियों का कहना है कि यदि जल्द ही समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।


