स्मार्ट मीटर में भेदभाव? उद्योगों को राहत,, आम उपभोक्ताओं पर सख़्ती…
आम उपभोक्ता की लाइन काटी,, बड़े बक़ायादारों के साथ चाय-नाश्ता : दोहरे मापदंड उजागर…
भारत समाचार 24×7.net…
विशेष रिपोर्ट…
✍️शब्बीर हसन…
सूरजपुर / बिश्रामपुर / 17 मार्च / 2026
ज़िले के बिश्रामपुर क्षेत्र में बिजली विभाग (CSPDCL) की कार्यप्रणाली इन दिनों सवालों के घेरे में है। ख़ासकर ‘इंडस्ट्रियल कनेक्शन’ जारी करने में दिखाई जा रही असामान्य तेज़ी ने पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आम उपभोक्ता जहां छोटी-छोटी सेवाओं के लिए भटक रहे हैं, वहीं उद्योगों को प्राथमिकता मिलने के आरोप लग रहे हैं।
⚡ आम उपभोक्ता लाइन में, उद्योगों को सीधा कनेक्शन…
स्थानीय लोगों का आरोप है कि मीटर बदलने या लोड बढ़ाने जैसे सामान्य कार्यों के लिए हफ्तों चक्कर काटने पड़ते हैं, जबकि औद्योगिक कनेक्शन तेज़ी से जारी हो रहे हैं। इससे विभाग की नीतियों और प्राथमिकताओं पर सवाल उठने लगे हैं।
⚡ रिकॉर्ड समय में पूरे हो रहे तकनीकी कार्य…
सूत्रों के अनुसार, इंडस्ट्रियल कनेक्शनों के लिए लाइन विस्तार, ट्रांसफार्मर इंस्टॉलेशन और तकनीकी निरीक्षण जैसे जटिल कार्य बेहद कम समय में पूरे किए जा रहे हैं। इतनी तेज़ी को लेकर स्थानीय स्तर पर ‘शॉर्टकट’ अपनाए जाने की चर्चा है।
⚡ तकनीकी जांच और पारदर्शिता पर सवाल…
लोड स्वीकृति और तकनीकी निरीक्षण प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी की बात सामने आ रही है। लोगों का कहना है कि निरीक्षण करने वाले अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए।
⚡ स्मार्ट मीटर में भी भेदभाव के आरोप…
जब CSPDCL के उच्च स्तर से सभी उपभोक्ताओं के लिए स्मार्ट मीटर लगाने के निर्देश जारी हो चुके हैं, तब बिश्रामपुर क्षेत्र में चयनात्मक तरीके से स्मार्ट मीटर लगाए जाने पर भी सवाल उठ रहे हैं।
आरोप है कि कई बड़े उद्योग, राइस मिलर और औद्योगिक प्लांट्स में अभी तक स्मार्ट मीटर नहीं लगाए गए, जबकि आम उपभोक्ताओं पर इसे लागू किया जा रहा है।
⚡ बक़ायादारों पर दोहरा रवैया?
क्षेत्र में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर एक और गंभीर आरोप सामने आ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जहां आम उपभोक्ता के मात्र 5 से 10 हज़ार रुपये तक के बक़ाया पर उसकी बिजली लाइन तत्काल काट दी जाती है, वहीं दूसरी ओर बड़े रसूखदार और प्रभावशाली उपभोक्ताओं के यहां लाखों रुपये तक के बिल बकाया होने के बावजूद कोई सख़्त कार्रवाई नहीं होती। आरोप यह भी है कि ऐसे मामलों में विभागीय अधिकारी कार्रवाई करने के बजाय वहां बैठकर चाय पीते नज़र आते हैं। इस कथित दोहरे मापदंड ने विभाग की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
⚡ बड़े सवाल, जिनका जवाब ज़रूरी…
हाल ही में कितने इंडस्ट्रियल कनेक्शन जारी किए गए?
क्या सभी कनेक्शनों में नियमों का पालन हुआ?
लाइन विस्तार और खर्च में पारदर्शिता है या नहीं?
स्मार्ट मीटर लगाने में भेदभाव क्यों?
⚡ जांच की मांग तेज़…
इस पूरे मामले में अब ज़िला स्तर के अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। क्षेत्र के जागरूक नागरिक निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, ताकि अगर कोई गड़बड़ी है तो उसका खुलासा हो सके।
⚡ विभाग की साख़ दांव पर…
बिश्रामपुर में औद्योगिक विकास का स्वागत है, लेकिन यदि इसके नाम पर नियमों की अनदेखी और पक्षपात होता है, तो यह विभाग की छवि को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। अब देखना होगा कि उच्च अधिकारी इस मामले में क्या क़दम उठाते हैं।

