जल जीवन मिशन की पाइपलाइन भी टूटी, लाखों का नुकसान—फिर भी कार्रवाई नहीं…
बिना नंबर के वाहन और अवैध मशीनों से खुदाई? ठेकेदार पर गंभीर सवाल…
श्रम विभाग में शिकायत दर्ज, लेकिन कार्रवाई शून्य—मिलीभगत के आरोप तेज़…
न बीमा, न पंजीयन, न सुरक्षा—लापरवाही की हद पार, ज़िम्मेदार विभागों की चुप्पी सवालों के घेरे में…
भारत समाचार 24×7.net…
विशेष रिपोर्ट…
शब्बीर हसन…
सूरजपुर | 10 अप्रैल | 2026
सूरजपुर जिले में NH43 के किनारे गैस पाइपलाइन बिछाने का कार्य बड़े स्तर पर चल रहा है, लेकिन इस कार्य में भारी अनियमितताएं देखने को मिल रही हैं। जानकारी के अनुसार, यह ठेका “विचित्र कंस्ट्रक्शन” को दिया गया है, जहां शासन के निर्धारित दिशा-निर्देशों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। कार्यस्थल पर न तो सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा है और न ही किसी प्रकार की निगरानी दिखाई दे रही है।

🚫 मज़दूरों की सुरक्षा से खिलवाड़…
कार्य में लगे मज़दूरों के लिए न तो जीवन बीमा की कोई व्यवस्था है और न ही सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। जेसीबी और अन्य मशीनों के संचालन में भी नियमों की अनदेखी हो रही है। कई वाहनों पर नंबर प्लेट तक नहीं हैं, जिससे साफ है कि नियमों को पूरी तरह दरकिनार किया जा रहा है। यह स्थिति किसी बड़े हादसे को न्योता दे रही है।

💧 जल जीवन मिशन की पाइपलाइन को भारी नुकसान…
गैस पाइपलाइन बिछाने के दौरान पहले से मौजूद जल जीवन मिशन की पाइपलाइन को भी भारी नुकसान पहुंचा है। जेसीबी से लापरवाही पूर्वक खुदाई के कारण कई किलोमीटर तक पानी की पाइपलाइन टूट चुकी है। एक पाइप की क़ीमत लगभग ₹15,000 बताई जा रही है, ऐसे में लाखों रुपए का नुकसान जनता के पैसों का सीधा दुरुपयोग है।

🤝 विभागों की चुप्पी और मिलीभगत के आरोप…
स्थानीय स्तर पर श्रम विभाग से संपर्क करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इससे यह आशंका और गहरी हो जाती है कि इस पूरे मामले में विभागीय मिलीभगत हो सकती है। ज़िम्मेदार अधिकारी इस गंभीर मुद्दे पर मौन साधे हुए हैं।

📉 दोयम दर्जे की कार्यप्रणाली बनी वजह…
सूत्रों के अनुसार, कई बार ठेकेदार कम लागत में अधिक मुनाफा कमाने या महंगे ठेके लेने के कारण गुणवत्ता से समझौता करते हैं। यही कारण है कि कार्य में लापरवाही, सुरक्षा की अनदेखी और संसाधनों का दुरुपयोग आम बात हो गई है। शासन द्वारा निगरानी की कमी भी इस समस्या को बढ़ा रही है।

🔥 जनता के पैसे पर सीधा प्रहार…
इस पूरे मामले में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि जनता के टैक्स से किए जा रहे विकास कार्यों में भारी भ्रष्टाचार और लापरवाही हो रही है। अगर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो यह नुकसान और भी बड़ा रूप ले सकता है।

🎤 सवालों से बचते नज़र आए ज़िम्मेदार, ठेकेदार ने भी दिए गोलमोल जवाब…
मौक़े पर मौजूद सेफ्टी ऑफिसर जुनैद अंसारी से जब सुरक्षा व्यवस्था, मज़दूरों के बीमा और पंजीयन को लेकर सवाल पूछे गए, तो वे स्पष्ट जवाब देने से बचते नज़र आए और हर प्रश्न से पीछा छुड़ाने की कोशिश करते दिखे। वहीं सिंपू यादव नामक व्यक्ति ने खुद को पेटी ठेकेदार तथा बिना नंबर के चल रहे वाहनों का स्वामी बताया, लेकिन जब उनसे इन अनियमितताओं पर जवाब मांगा गया तो वे भी आक्रोशित हो गए और गोलमोल बातें करते हुए सवालों को टालते नज़र आए।

📞 प्रोजेक्ट मैनेजर का विवादित रवैया, सवालों पर दिखाई बदतमीज़ी…
वहीं जब ग्राउंड ज़ीरो पर हमने प्रोजेक्ट मैनेजर प्रदीप मिश्रा से बात करने की कोशिश की तो वे मौक़े पर नदारद मिले। इसके बाद फोन कॉल पर जब उनसे बातचीत हुई, तो उन्होंने भी सवालों को उलझाने की कोशिश की। जब उनसे मज़दूरों के बीमा और पंजीयन को लेकर पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि सब कुछ है, लेकिन जब उनसे इसे दिखाने या स्पष्ट जानकारी देने को कहा गया तो उन्होंने उल्टा सवाल करते हुए कहा—“आप कौन हैं, हम आपको क्यों दिखाएं और आपको क्यों बताएं?” इस तरह के बदतमीज़ी भरे लहजे में उन्होंने बातचीत की, जो ज़िम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति के रवैये पर गंभीर सवाल खड़े करता है।


