तीन मौतों के पीछे छिपी एक ऐसी कहानी, जो हर माता-पिता और हर बच्चे को सोचने पर मजबूर कर देगी…
टूटे परिवार को जोड़ना चाहता था कुणाल, कहानी का दर्दनाक अंत…
कुणाल की मौत से बड़ा सवाल—क्या हमने उसके मन की आवाज़ सुनी?
भारत समाचार 24×7.net…
विशेष रिपोर्ट…
✍️शब्बीर हसन…
24 अगस्त 2026 सोमवार…
महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर की पहाड़ी पर हुई तीन मौतों ने पूरे देश को झकझोर दिया। शुरुआती ख़बरों में इसे iPhone को लेकर हुए विवाद से जोड़कर देखा गया। पुलिस की शुरुआती जानकारी के मुताबिक कुणाल पहाड़ी पर पहुंचा और जान देने की धमकी देने लगा। क़रीब तीन घंटे तक उसे बचाने की कोशिश होती रही, लेकिन देखते ही देखते कुणाल, उसके पिता और उसकी मां—तीनों की जान चली गई।

लेकिन कुणाल की मौसी ने बताई एक अलग कहानी…
कुणाल की मौसी कल्याणी ने iPhone को इस घटना की वजह मानने से इनकार किया है। उनका कहना है कि लोग पूरी सच्चाई जाने बिना कहानी बना रहे हैं। मौसी के मुताबिक कुणाल काफी समय से चाहता था कि उसके मम्मी-पापा फिर से एक साथ रहें और परिवार दोबारा एक छत के नीचे आए। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामले की जांच जारी है।

कुणाल के लिए सबसे बड़ी चाहत क्या थी?
अगर मौसी के इस दावे को सही माना जाए, तो सवाल iPhone का नहीं, उस टूटते हुए परिवार का है जिसे कुणाल जोड़ना चाहता था। एक बच्चा, जो अपने माता-पिता को अलग-अलग नहीं, बल्कि एक साथ देखना चाहता था… शायद उसकी सबसे बड़ी ज़रूरत कोई महंगा मोबाइल नहीं, बल्कि मां-बाप का साथ और परिवार का प्यार था।
पिता बचाने दौड़े… मां ने भी गंवाई जान…
21 अगस्त को कुणाल पहाड़ी पर पहुंचा। परिवार, ग्रामीण, पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम ने घंटों उसे समझाने की कोशिश की। क़रीब तीन घंटे बाद कुणाल नीचे गिरा और उसके पिता उसे बचाने की कोशिश में ख़ुद भी गहरी खाई में गिर गए। इसके बाद मां ने भी छलांग लगा दी। तीनों की मौत हो गई।
यह हादसा था या ख़ुदकुशी?
इस घटना में कई सवाल आज भी अनुत्तरित हैं। क्या कुणाल ने जान देने का फैसला किया था? क्या उसके पिता उसे बचाते हुए हादसे का शिकार हुए? और मां ने पति और बेटे को गिरते देखकर जो क़दम उठाया, वह सदमे में उठाया गया फैसला था या कुछ और?

हिमालय पब्लिक स्कूल का होनहार छात्र था कुणाल…
कुणाल महाराष्ट्र के हिमालय पब्लिक स्कूल का छात्र था और पढ़ाई में बेहद होनहार बताया जाता था। स्कूल में उसकी प्रतिभा की पहचान आज भी दर्ज है। स्कूल परिसर के बाहर कुणाल का नाम उसके प्राप्त अंकों के साथ लिखा हुआ है, जो बताता है कि वह सिर्फ एक सामान्य छात्र नहीं, बल्कि अपने स्कूल का एक प्रतिभाशाली और मेधावी बच्चा था। जिस बच्चे के सामने ज़िंदगी में आगे बढ़ने के अनगिनत रास्ते थे, उसकी कहानी इस तरह ख़त्म हो जाना हर माता-पिता, शिक्षक और समाज के लिए एक गहरी चिंता और बड़ा सवाल छोड़ जाता है। एक होनहार बच्चे को ज़िंदगी से हारने से पहले अगर उसके मन की बात सुन ली जाती, तो शायद कहानी कुछ और होती।
इन सवालों का अंतिम जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा।
बच्चों के लिए एक बहुत बड़ा सबक़…
बच्चों को यह समझना होगा कि कोई मोबाइल, कोई गैजेट, कोई EMI और कोई इच्छा ज़िंदगी से बड़ी नहीं होती।
गुस्सा कुछ मिनटों का हो सकता है, लेकिन एक ग़लत फैसला पूरी ज़िंदगी छीन सकता है—अपनी भी और अपनों की भी।
माता-पिता के लिए भी एक सवाल…
बच्चों को सिर्फ सुविधाएं देना ही पर्याप्त नहीं है। उन्हें समय देना, उनकी बातें सुनना और उनके मन में चल रहे संघर्ष को समझना भी उतना ही ज़रूरी है। कई बार बच्चा जो कह नहीं पाता, उसकी ख़ामोशी बहुत कुछ कह रही होती है।
कुणाल की कहानी हमें रुलाती भी है और चेताती भी…
कुणाल को iPhone चाहिए था या नहीं—इस सवाल से ज़्यादा बड़ा सवाल यह है कि एक बच्चे के मन में आख़िर ऐसा क्या चल रहा था कि ज़िंदगी उसे समाधान नहीं, बल्कि समस्या जैसी दिखाई देने लगी?
इस घटना को सिर्फ “iPhone के लिए तीन मौत” कहकर ख़त्म कर देना शायद इस त्रासदी का सबसे बड़ा सबक खो देना होगा।
कभी-कभी बच्चों को महंगे खिलौने नहीं चाहिए होते…
उन्हें बस चाहिए होता है—मां का हाथ, पिता का साथ और एक ऐसा घर जहां परिवार साथ हो।
और ऐसी घटनाओं के बाद दिल से बस यही आवाज़ निकलती है—
“तुझसे नाराज़ नहीं ज़िंदगी, हैरान हूँ मैं – हैरान हूँ मैं…”
भारत समाचार 24×7 की अपील, ज़िंदगी अनमोल है—अगर कोई बच्चा गुस्से, तनाव, पारिवारिक विवाद या किसी परेशानी में ख़ुद को नुकसान पहुंचाने की बात करे, तो उसे अकेला न छोड़ें। उसकी बात सुनें, उसे सुरक्षित जगह पर रखें और तुरंत परिवार के भरोसेमंद लोगों तथा स्थानीय आपात मानसिक स्वास्थ्य सहायता से संपर्क करें।

