रूस और चीन दोनों पर भारत की नज़र, BRICS से पहले सक्रिय हुई मोदी सरकार की कूटनीति…
मॉस्को से बीजिंग तक भारत की कूटनीति तेज़, दुनिया की नज़र दिल्ली पर…
भारत समाचार 24×7.net…
विशेष रिपोर्ट…
✍️शब्बीर हसन…
नई दिल्ली। भारत ने आगामी BRICS शिखर सम्मेलन से पहले रूस और चीन के साथ कूटनीतिक मोर्चे पर एक साथ सक्रियता बढ़ा दी है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 23-24 अगस्त को मॉस्को में रूस के शीर्ष नेतृत्व के साथ महत्वपूर्ण बातचीत की, जबकि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल 25 अगस्त को बीजिंग में भारत-चीन सीमा वार्ता के 25वें दौर में शामिल हुए। इन दोनों यात्राओं को सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है।
पुतिन से मिले जयशंकर, भारत-रूस रिश्तों पर ज़ोर…
मॉस्को यात्रा के दौरान जयशंकर ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाक़ात की। बातचीत में भारत-रूस संबंधों के साथ आर्थिक सहयोग, व्यापार, ऊर्जा, उर्वरक और परमाणु ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर चर्चा हुई। जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग में काफी महत्वपूर्ण विस्तार हुआ है। जयशंकर की रूस यात्रा के दौरान भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग के 27वें सत्र पर भी विशेष ध्यान रहा। ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक समीकरण तेज़ी से बदल रहे हैं, भारत रूस के साथ अपने पारंपरिक रणनीतिक संबंधों को बनाए रखते हुए आर्थिक और ऊर्जा सहयोग को और मज़बूत करने की कोशिश कर रहा है।
चीन पहुंचे अजीत डोभाल, सीमा विवाद पर अहम वार्ता…
दूसरी ओर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल बीजिंग में भारत-चीन के बीच स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव्स वार्ता के 25वें दौर में हिस्सा ले रहे हैं। उनकी मुलाकात चीनी विदेश मंत्री और भारत-चीन सीमा वार्ता में चीन के विशेष प्रतिनिधि वांग यी से हुई। बातचीत में सीमा पर शांति और स्थिरता के साथ दोनों देशों के व्यापक द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने पर चर्चा महत्वपूर्ण है। भारत लगातार यह रुख दोहराता रहा है कि सीमा पर शांति और स्थिरता ही भारत-चीन संबंधों को सामान्य बनाने की बुनियादी शर्त है। ऐसे में डोभाल की बीजिंग यात्रा को दोनों देशों के रिश्तों में आगे की संभावनाओं के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
BRICS सम्मेलन में शी जिनपिंग की संभावित मौजूदगी…
भारत इस वर्ष BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और 12-13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन आयोजित होने की तैयारी है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सम्मेलन में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है, हालांकि उनकी यात्रा की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। Reuters के मुताबिक, यदि शी जिनपिंग भारत आते हैं तो यह सात साल बाद उनकी भारत यात्रा होगी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ संभावित मुलाक़ात पर भी पूरी दुनिया की नज़र रहेगी। यही वजह है कि डोभाल की चीन यात्रा को BRICS से पहले भारत-चीन संबंधों को संभालने की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। सीमा विवाद के बीच दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क बढ़ना क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति के लिए भी अहम संकेत है।
RIC के लिहाज़ से भी महत्वपूर्ण समय…
भारत की मौजूदा कूटनीतिक सक्रियता को RIC यानी Russia-India-China के व्यापक संदर्भ में भी देखा जा रहा है। रूस के साथ भारत के मज़बूत संबंध और चीन के साथ संवाद को आगे बढ़ाने की कोशिश भारत की उस रणनीति को दिखाती है जिसमें नई दिल्ली अलग-अलग शक्ति केंद्रों के साथ अपने हितों के अनुसार संतुलित संबंध बनाए रखना चाहती है। एक तरफ जयशंकर मॉस्को में रूस के साथ आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को मज़बूत कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ डोभाल बीजिंग में सीमा और द्विपक्षीय संबंधों पर बातचीत कर रहे हैं। इसके बाद सितंबर में नई दिल्ली में BRICS का मंच दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व को एक साथ लाने का अवसर देगा।
दुनिया की नज़र भारत की कूटनीति पर…
रूस, चीन और BRICS के बीच भारत की यह सक्रिय कूटनीति ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक राजनीति में नए शक्ति-संतुलन बन रहे हैं। भारत एक ओर रूस के साथ अपने पुराने रणनीतिक रिश्तों को मज़बूत कर रहा है, वहीं चीन के साथ सीमा तनाव कम करने और संवाद बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। BRICS सम्मेलन में यदि मोदी, शी जिनपिंग और पुतिन एक मंच पर आते हैं, तो यह केवल BRICS के लिए ही नहीं बल्कि वैश्विक कूटनीति के लिहाज़ से भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम होगा। फिलहाल भारत की कोशिश साफ दिखाई दे रही है—रूस से रिश्ते मज़बूत, चीन से संवाद जारी और BRICS के मंच पर अपनी रणनीतिक भूमिका को और प्रभावी बनाना।

