जलप्रलय से दहला नेपाल: तबाही के मंज़र ने बढ़ाई भारतीयों की चिंता…
नेपाल में मौत का सैलाब, सैकड़ों ज़िंदगी अब भी संकट में…
भारत समाचार 24×7.net…
विशेष रिपोर्ट…
✍️शब्बीर हसन…
काठमांडू। नेपाल-तिब्बत सीमा से लगे इलाक़ों में आई विनाशकारी बाढ़ और मलबे के सैलाब ने भारी तबाही मचा दी है। अचानक आए तेज़ जलप्रवाह ने कई बस्तियों, सड़कों, पुलों और महत्वपूर्ण ढांचों को अपनी चपेट में ले लिया। ताज़ा रिपोर्टों के मुताबिक़ मृतकों की संख्या 160 के पार पहुंच गई है, जबकि सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं। इनमें 133 भारतीय नागरिकों के लापता होने की जानकारी भी सामने आई है। राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है और मृतकों व लापता लोगों की संख्या में आगे भी बदलाव की आशंका है।
चंद मिनटों में उजड़ गया पूरा बाज़ार, सड़कें-पुल भी बहे…
नेपाल के रसुवा और आसपास के पहाड़ी इलाक़ों में जलप्रलय ने तबाही का ऐसा मंज़र दिखाया कि कई जगहों पर देखते ही देखते सड़कें और पुल पानी व मलबे में समा गए। कई वाहन बह गए और मकानों को भारी नुकसान पहुंचा। दुर्गम पहाड़ी इलाक़ों में संपर्क मार्ग टूटने से राहत और बचाव दलों को प्रभावित लोगों तक पहुंचने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
133 भारतीय लापता, कैलाश मानसरोवर यात्रियों की चिंता बढ़ी…
इस आपदा ने भारत की चिंता भी बढ़ा दी है। लापता भारतीयों में बड़ी संख्या में वे लोग शामिल बताए जा रहे हैं जो कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए नेपाल के रास्ते आगे बढ़ रहे थे। भारतीय और नेपाली एजेंसियां लापता लोगों का पता लगाने तथा प्रभावित नागरिकों को सुरक्षित निकालने के प्रयासों में जुटी हैं।
भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ…
भीषण आपदा के बाद भारत की ओर से नेपाल को राहत सहायता भेजी गई है। दोनों देशों की एजेंसियां राहत और बचाव कार्य में समन्वय कर रही हैं। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त संचार एवं सड़क नेटवर्क के कारण बचाव अभियान चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
आखिर इतनी तेज़ी से कैसे आया सैलाब?
प्रारंभिक वैज्ञानिक आकलनों के अनुसार यह आपदा हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर/बर्फ और चट्टानों के बड़े पैमाने पर खिसकने से उत्पन्न मलबे के प्रवाह से जुड़ी हो सकती है। इसके बाद भारी मात्रा में पानी, बर्फ, चट्टान और मलबा नदी तंत्र में पहुंचा और देखते ही देखते भयावह फ्लैश फ्लड का रूप ले लिया। ऐसी घटनाओं में पानी बेहद कम समय में कई मीटर तक बढ़ सकता है, जिससे लोगों को संभलने का मौक़ा भी नहीं मिलता।
ऐसे हालात में क्या करें? जान बचाने के लिए इन बातों का रखें ध्यान
अचानक बाढ़ या फ्लैश फ्लड की स्थिति में नदी, नाले, पुल और निचले इलाक़ों से तुरंत दूरी बनाना सबसे ज़रूरी है। प्रशासन की ओर से सुरक्षित स्थान या ऊंचाई वाले इलाक़े में जाने का निर्देश मिले तो बिना देरी उसका पालन करें। बहते पानी को पैदल या वाहन से पार करने की कोशिश बिल्कुल न करें, क्योंकि पानी की गहराई और बहाव का अंदाज़ा लगाना बेहद मुश्किल होता है।
मोबाइल फोन को चार्ज रखें और ज़रूरी होने पर SMS या उपलब्ध संचार माध्यमों से परिवार और प्रशासन से संपर्क बनाए रखें। अफ़वाहों पर भरोसा न करें और केवल आधिकारिक चेतावनियों व विश्वसनीय समाचार स्रोतों से जानकारी लें। NDMA भी आपदा की स्थिति में शांत रहने, अफ़वाहों से बचने और मोबाइल को आपात संचार के लिए तैयार रखने की सलाह देता है।
यदि घर में पानी तेज़ी से घुस रहा हो तो बिजली के उपकरणों से दूर रहें और सुरक्षित ऊंचे स्थान पर जाएं। ज़रूरी दवाइयां, पीने का पानी, सूखा भोजन, टॉर्च, पावर बैंक, पहचान पत्र और मोबाइल जैसी आवश्यक वस्तुएं साथ रखें। बच्चों, बुज़ुर्गों और बीमार लोगों को प्राथमिकता से सुरक्षित स्थान पर पहुंचाएं।
सबसे महत्वपूर्ण बात—बाढ़ का पानी उतरता हुआ दिखाई दे तब भी तुरंत नदी, नाले या टूटे पुल की ओर न जाएं। अचानक दोबारा तेज़ बहाव आ सकता है और मलबे में छिपे गड्ढे, तार या अन्य ख़तरे जानलेवा हो सकते हैं।
नेपाल की यह त्रासदी एक बार फिर बताती है कि पहाड़ी और नदी किनारे रहने वाले इलाक़ों में प्राकृतिक आपदा के समय समय पर चेतावनी, सुरक्षित स्थान की जानकारी और प्रशासन के निर्देशों का पालन जीवन बचाने में सबसे अहम भूमिका निभाता है।

